संगीत सुनना और वाद्य बजाना: बुजुर्गों में डिमेंशिया जोखिम कम

ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि संगीत उम्र के साथ होने वाले मस्तिष्कीय बदलावों की रफ्तार को धीमा कर सकता है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के 10,800 से ज्यादा लोगों के विश्लेषण में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से संगीत सुनते थे, उनमें डिमेंशिया का जोखिम 39% कम था, जबकि वाद्य यंत्र बजाने वालों में यह जोखिम 35% कम दिखा। कुल मिलाकर, आंकड़े संकेत देते हैं कि ऐसी आदत उम्रदराज दिमाग के लिए ठोस सहारा बन सकती है।

यह अध्ययन प्रोफेसर जोआन रयान और छात्रा एमा जैफ़ा की अगुवाई में हुआ और इसके नतीजे इंटरनेशनल जर्नल ऑफ जेरियाट्रिक साइकिएट्री में प्रकाशित हुए। काम के लिए ASPREE (ASPirin in Reducing Events in the Elderly) और ALSOP परियोजनाओं के आंकड़े लिए गए, जो दोनों ही बुजुर्ग आबादी के स्वास्थ्य पर केंद्रित हैं।

सबसे कम जोखिम उन प्रतिभागियों में दिखा जो संगीत को लगातार सुनते रहे, न कि कभी‑कभार। इनमें संज्ञानात्मक हानि की आशंका भी कम रही और वे रोजमर्रा की घटनाओं को याद रखने में बेहतर पाए गए—एक ऐसी क्षमता जो उम्र के साथ अक्सर कमजोर पड़ती है।

जिन प्रतिभागियों ने सुनने के साथ वाद्य यंत्र बजाना भी जारी रखा, वे भी अलग नजर आए: इनमें डिमेंशिया का जोखिम 33% कम और संज्ञानात्मक हानि की संभावना 22% कम रही। रुझान साफ है—दैनिक जीवन में संगीत को जगह देना बेहतर संज्ञानात्मक नतीजों से जुड़ता दिखता है।

एमा जैफ़ा ने बताया कि संगीत से जुड़ी गतिविधियां बुजुर्गावस्था में मानसिक स्वास्थ्य को सहारा देने का सरल और सुलभ तरीका बन सकती हैं। प्रोफेसर रयान ने जोड़ते हुए कहा कि जब डिमेंशिया का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, तो जीवनशैली आधारित रोकथाम पर खास ध्यान देना चाहिए; उनके अनुसार, उम्र के बाद के दौर में मस्तिष्क स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए संगीत सबसे सुरक्षित और स्वाभाविक साधनों में शुमार है। ऐसे संदर्भ में यह सलाह विशेष रूप से व्यवहारिक लगती है।